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रविवार, 17 सितंबर 2023
पूस प्रवास भाग 07 और 08 || Hindi Kahani || Hindi Story || H
गुरुवार, 14 सितंबर 2023
हिन्दी दिवस पर कविता || हिन्दी दिवस पर शायरी || " हिन्दी माई "
हिन्दी दिवस पर कविता || हिन्दी दिवस पर शायरी ||
नमस्कार दोस्तों, स्वागत है आपका हिन्दी को समर्पित इस पेज पर। हिन्दी दिवस के मौके पर मेरी एक कविता,
ज्ञानार्जन का साहस देकर
मुस्काती दिखती मां हिंदी
पढ़ लिखकर नूतन रचने का
ऐसा यश देती मां हिंदी
यहां अनेकों भाषा बोली
एक सूत्र यह बांधे बोली
जब शब्दों ने आंखें खोली
काव्य सजे मानो रंगोली
भाषा दूजी समझ ना आयी
तुमरे पास सहजता पायी
बहुत धनी है अपनी माई
बोलो हिंदी मेरे भाई
सदानन्द कुमार
समस्तीपुर बिहार
बुधवार, 17 मई 2023
Hindi Shayari || Poets from Samastipur
Hindi Shayari || Poets from Samastipur
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लिखी अपनी कहानी में तुझे मैंने बताया है
जहां ऐसी जरूरत थी वहां तुझको छिपाया है
रहे तेरी खुमारी में दिया उसका किराया है
लिखा जो कुछ कभी मैंने सुनो वो भी बकाया है
सदानन्द कुमार
समस्तीपुर बिहार
साथ छूटा मैं तमाशा बन गया
ख्वाब टूटा मैं फसाना बन गया
सोचता था मैं अनाड़ी हूं अभी
यार उसका मैं ठिकाना बन गया
मुहब्बत में दिवानो ने यहां सब कुछ लुटाया है
असासा बेचकर अपना गिफट उसको दिलाया है
जमाना भूल जाएगा सितम ये की यहां तूने
पुरानी आशिकी के नाम का टैटू छुपाया है
शनिवार, 6 मई 2023
पूस प्रवास भाग 09 और 10 || Short Stories in Hindi || Hindi Kahani || Desi Kahani
Welcome to Short Stories in Hindi || Hindi Kahani blog.
पूस प्रवास भाग 09
सफरनामा
बीच सफर में अपने चोरी हो चुके सूटकेस से गूची जी का मन अब इतना विचलित हो चुका था कि अब गूची जी को समूचा संसार ही 420 बुझा रहा था, पर कहीं ना कहीं उनका मासूम दिल ये भी मानने को तैयार नहीं हो रहा था कि इतनी शांतचित्त मृगनयनी सुंदरी उसका सूटकेस उठाने जैसा तुच्छ काम करेगी, बात विचार और आभामंडल से तो वो किसी प्रेमनगर की प्रिसेंस लग रही थी।
अब प्रिंसेस सरीखी लड़कियां अगर ट्रेन के स्लीपर क्लास में नीरीह जनता के सूटकेस टपाने लगे तो ये बेचारे चोर उचक्के और जगत में विचरन कर रहे लफंडरों के सामने तो रोजगार की विकट समस्या उत्पन्न हो जाएगी ।
ऐसे ही कई ऊटपटांग विचारों में मुग्ध गूची जी ऐसे सुन्न से बैठे मालूम पड़ रहे थे मानों अपनी अंतरात्मा से अपने सूटकेस के मुक्ति का मार्ग पूछ रहे हों । गूची जी को इतने गंभीर चिंतन में गुम देख सहयात्रियों को ये बात बिल्कुल स्पष्ट हो गयी कि गूची जी को सूटकेस का बहुत गंभीर सदमा लगा है । सामने बैठे बुजुर्ग दंपति में से चाचा जी को तो गूची जी पर तनिक भी दया नहीं आई पर गूची जी को ऐसे मौन बैठे देख चाची के दिल में थोड़ी करूणा आई और ममत्व वश वह पूछ बैठी कि बेटा सूटकेस में कोई बहुत जरूरी चीजें थी क्या ? इससे पहले कि गूची जी हां या नहीं कहते चाचा जी बोल पड़े - " अरे ! अगर जरूरी चीजें नहीं होती तो ये अपने छाती पर लादकर उस सूटकेस को क्यूं लाता ? " यह सुनकर गूची जी ने निरूत्तर रहना ही ठीक समझा पर यह सवाल सुनकर गूची जी के मन में एक बात कौंधी कि सूटकेस में तो ऐसे कई जरूरी सामान थे पर एक दो फटेहाल बनियान और छेद युक्त कच्छे भी तो थे, भले ही उस सुंदरी ने चोरी के इरादे से सूटकेस उठाया था पर सूटकेस खोलते ही वो मेरे फटेहाली से अवगत हो जाएगी । ये सोचकर गूची जी के आंखों के सामने और भी अंधेरा छाने लगा।
यूं तो संसार में यह बात व्याप्त है कि पुरुष का मन बड़ा ही कठोर होता है पर बात अगर किसी नवयौवना की हो तो गूची जी जैसे पुरुष बड़े उदार मन से उसके लिए अपना सूटकेस तो क्या अपनी जमीन जायदाद भी लूटा देते, ऐसे पुरुष नवयुवती के लिए हमेशा क्षमाशील बने रहते हैं, चाहें नवयुवतियां उनकी लंका ही क्यूं ना लगा दें पर इतने उदार हृदय से क्षमाशील बने रहने का कभी कभी कोई फायदा नहीं क्योंकि नए कल्चर के लोग इसे ठरकपन के रूप में परिभाषित कर देते हैं, खैर,, जो भी हो,,
" पूस प्रवास भाग 10 "
वैसे तो सफ़र में लूट जाने का एहसास इतना भारी है कि इस पर कई तरह के मारक और दिल का दर्द बयां करते हुए कई तरह के शेरों शायरी व नगमें लिखें जा सकतें है पर चूंकि अपने गूची जी के लिए यह जीवन का पहला अनुभव था इसलिए वो फिलहाल बस मन ही मन उस मृगनयनी को उसकी बेवफ़ाई के लिए याद करते जा रहे थे, ध्यान दीजिएगा कि याद करते जा रहे थे कोस नहीं रहे थे, बल्कि कहीं न कहीं उनके मन में मृगनयनी को कोसने के बजाय अब हल्की हमदर्दी का भाव उभर आ रहा था कि हाय कितनी मजबूरी में रही होगी बेचारी जो ऐसा सुंदर रूप होते हुए बेचारी को चोरी जैसा तुच्छ काम करना पड़ रहा है ।
गूची जी के मन में तो अब ऐसे भाव आ रहे थे कि मानों यदि गूची जी को पहले से पता होता कि वो मृगनयनी उसका सूटकेस टपाने वाली है तो खुद गूची जी अपने जेब से निकालकर सूटकेस में कुछ रूपए रख देते, कम से कम बेचारी उस लड़की की कुछ मदद हो जाती और यदि सूटकेस खोलते ही उस मृगनयनी को कुछ रूपए मिल जाते तो गूची जी की कंगाली भी उजागर होने से बच जाती लेकिन हाय रे संजोग कि जिंदगी पहले से कुछ बताती नहीं ।
ऐसे ही कुछ महान विचारों में लीन गूची जी अपने सीटबर्थ पर किसी विशालकाय कछुए की भांति बिल्कुल शांत पड़े हुए थे, बगल की सीट पर सफ़र कर रहे बुजुर्ग दंपति में से चाची फिर बोल उठी- " बेटा, मन छोटा मत करो, सामने वाले स्टेशन पर उतर कर कम से कम एक शिकायत ही लिखवा देना, अब सूटकेस तो मिलने से रहा कम से कम एक कागज तो रहेगा तुम्हारे पास कि तुम्हारा सूटकेस चोरी हुआ है । क्या पता कहीं रेलवे वालों की तरफ से कुछ हर्जाना ही मिल जाए " चाची की बात सुनकर गूची जी की चेतना थोड़ी वापस आई, उन्होंने सोचा कि बात तो सही है आखिर उनका सूटकेस गायब होने का कुछ तो सबूत होना ही चाहिए और अगर कहीं रेलवे वालें दया धर्म दिखा गए तो उनको अपने छेद युक्त कच्छो का हर्जाना मिलेगा वो अलग ।
इतना सोचते ही आंखों में चमक लिए गूची जी उठने को हुए ही थे कि चाचा जी चाची से बोल पड़े - " हर्जाना ?? क्या बड़बड़ाती हो ? हर्जाना मिले ना मिले पर शिकायत लिखवाने के चक्कर में जो पैसे जेब में है वो भी रिश्र्वत के नाम पर निकल जाएंगे । "
ऐसा कटू सत्य सुनकर गूची जी फिर कछुआ हो गए, किसी ने बिल्कुल सही कहा है कि सच तो कड़वा होता है ।
खैर, जैसे तैसे अपने दिल का दर्द लिए गूची जी का सफ़र और रेल दोनों धीरे धीरे अपने मंजिल की ओर बढ़ते जा रहे थे । गुनगुने धूप में चल पड़ी रेल अब हाड़ कपकपा देने वाली ठंड कोहरे और रात के अंधेरे से होती हुई धीरे धीरे एक स्टेशन पर सुस्ताने को हुई, ट्रेन के स्टेशन पर रुकते ही बुजुर्ग चचा ने गूची जी को लगभग आदेशात्मक लहजे में साथ में एक कप चाय पी आने को कहा, शायद चचा भीतर ही भीतर गूची जी के मनोभावों को समझ रहे थे, आखिर किसी ज़माने में चचा भी दिल और दिमाग के इसी कैमिकल लोचे से गुज़रे होंगे । वैसे तो चचा को दिली इच्छा थी कि गूची उसके साथ नीचे चाय पीने आए ताकि चचा उसे अपने जवानी की नादानियों से अर्जित करे गए अनुभव और सीख बता सकें, चचा को ऐसा लगता था कि उनके द्वारा दिया गया ज्ञान गूची के दर्दे दिल की दवा बन सकता है क्योंकि इस ज्ञान की बात के मूल में यह तर्क था कि ख़ुबसूरत लड़कियां भोले भाले लड़कों को उल्लू बनाती ही हैं पर यह ज्ञान वो चाची के सामने गूची को नहीं दे सकते थे वरना चाची उनसे उनके जवानी के दिनों का हिसाब मांग बैठती । लाख टोनियाने के बाद भी गूची जी का मन नीचे जाने को नहीं हुआ और चचा को अकेले ही अपने ज्ञान की घुट्टी और चाय पीने नीचे उतरना पड़ा,,
क्रमशः,,,,
सदानन्द कुमार
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गुरुवार, 27 अप्रैल 2023
Sad Poetry in Hindi || Broken Heart Shayari
Sad Poetry in Hindi || Broken Heart Shayari पोस्ट पर आपका स्वागत है ।
दोस्तों, Sad Poetry in Hindi और Broken Heart Shayari सदियों से चली आ रही है। ये खुद को व्यक्त करने का एक रूप हैं जो हमें वैसे लोगों से जुड़ने का मौका देता है जिन्होंने ऐसी भावनाओं को जिया हो। ये कविताएँ और शायरियाँ कभी कभी बेहद मार्मिक तो कभी कभी हल्की उदासी लिए हो सकती हैं।
Sad Poetry in Hindi और Broken Heart Shayari के इतने लोकप्रिय होने का एक कारण यह है कि इन कविताओं और शायरियों को लिखने या पढ़ने से हमें अपनी भावनाओं को व्यक्त करने और अपने दर्द को समझने में मदद मिल सकती है। यह कविताएं जीवन में हमें कम अकेला भी महसूस करा सकता है।
Sad Poetry in Hindi और Broken Heart Shayari सुकून देने के अलावा कभी कभी अविश्वसनीय रूप से सुंदर भी होती है। दिल टूटने के दर्द को बयां करने के लिए हम अक्सर रूपकों और ज्वलंत कल्पना का उपयोग करते हैं। उदाहरण के लिए, एक broken heart की तुलना टूटे हुए आईने से की जा सकती है, या दर्द को एक तूफानी समुद्र के रूप में बयां किया जा सकता है। ये रूपक कविताओं और शायरियों को और अधिक शक्तिशाली बनाते हैं।
यदि आप एक कठिन समय से गुजर रहे हैं और कुछ आराम की जरूरत है, तो Sad Poetry in Hindi और Broken Heart Shayari वही हो सकती है जो आपको चाहिए।
अंत में, Sad Poetry in Hindi और Broken Heart Shayari अभिव्यक्ति के शक्तिशाली रूप हैं जो हमें दिल टूटने के साथ आने वाली कठिन भावनाओं को दिशा दिखाने में मदद कर सकते हैं। वे हमें याद दिलाते हैं कि हम अपने अनुभवों में अकेले नहीं हैं। यदि आप दिल टूटने से जूझ रहे हैं, तो इस शैली की कविता आपको काफी सुकून दे सकतीं हैं ।
आईए कुछ Sad Poetry in Hindi और Broken Heart Shayari देखते हैं ।
1)
आसमां में एक कविता लिख दूं मैं नाम तुम्हारे
परियां जिसे पढ़ती हो और हमारा प्रेम निहारे
छुप कर कमरे में कविताएं पढ़ने तुम आती हो
ये चंदा और जुगनू सारे जाने हैं मनोभाव तुम्हारे
2)
लिखकर मुझे मिटा दिया, भूल गई मम प्रीत
सजल नयन रो रो कहे, तुम मम मन की मीत
शरद ऋतु की सांझ में गौरैया के गीत
गौरैया भी गा रही, तुम संग मम अतीत
3)
डूब जाने से पहले एक बार, दूर तलक तर लेना था,
भींगे नयनों के कोर से तुमरे, पोर पोर भर लेना था,
ठंडे ठहरे ताल में तुम जब जल तरंग बनाती थी,
निज भवंर भूल कर सबको तुमसे प्रेम कर लेना था,
सदानन्द कुमार समस्तीपुर बिहार
रविवार, 23 अप्रैल 2023
हास्य व्यंग कविता हिन्दी || राजनैतिक व्यंग शायरी || राजनीति पर व्यंग्य कविता || ' नेता गर बनना हो '
वैसे तो आप लोग पढ़ें लिखे लोग हैं और इससे पहले आपने अनेकों हास्य व्यंग कविता हिन्दी , राजनैतिक व्यंग शायरी और राजनीति पर व्यंग्य कविता इत्यादि पढ़ रखें होंगे । पढ़ कर पचा भी चुके हैं इसलिए आशा करता हूं कि आप लोग मुझे भी फैलने का अवसर जरूर देंगे ।
दोस्तों जैसा कि आप सब जानते ही हैं कि आजकल दूसरों की खटिया खड़ी कर देने का दौर है, कोई किसी बहाने मेरी खटिया खड़ी ना कर दे इसलिए मैं पहले ही एक डिस्क्लेमर दे देना चाहता हूं कि यह कविता पूर्णतः मौज मस्ती में लिखी गई कविता है, इसको गंभीरता से न लें और न ही इससे अपनी भावनाओं को आहत होने दें, ये कविता भावनाएं आहत करने के लिए नहीं लिखी गई है ।
हां एक बात और कविता में मात्रा और वर्ण की खामियां निकाल कर मेरी भी भावनाएं आहत न करें ।
छोटा सा कवि उछलना चाहता है तो इसमें आपसब का सहयोग अपेक्षित है, ध्यान रहे उछलना चाहता हूं ऐसा न हो कि आप लोग मुझे कुदा दें वो भी गड्डे में ।
उछलने और कूदने में फर्क होता है भाई !
तो ज्यादा चकलल्स न करते हुए प्रस्तुत है मेरी स्वरचित रचना
' नेता गर बनना हो '
( हास्य व्यंग कविता हिन्दी || राजनैतिक व्यंग शायरी )
नेता गर बनना हो, ये दिल में तमन्ना हो
काम चुन कर कोई, ऐसा नीच कीजिए,
चाहते हो आपको जो, मानते हो आपको जो
खोपचे में ले जाकर, उन्हें मूड़ लीजिए
लंबी लंबी फेंका करें, कभी भी ना झेंपा करें
पप्पु फेंकु होने तक, फाड़ू स्पीच दीजिए
मुख पर तेज रहे, इतना करेज रहे
गुरु जी की लंगोटी को , फाड़े फाड़े दीजिए
गाली गुत्था आता ही हो, पद सब भाता ही हो
पैसा चंदा सब कुछ, संत बन लीजिए
कोई गर विरोधी हो, सज्जन भले बोधी हो
बगुला भगत बन, उन्हें रेल दीजिए
बिकास बौखत रहें, ढ़ांचे दरकत रहें
पार्टी दल वाला सर, खेल कर लीजिए
फंसा कर निज पेंच, कर लियो सब केंच
माल मोटा देख कर, मेल कर लीजिए
© सदानन्द कुमार
समस्तीपुर बिहार
शनिवार, 10 दिसंबर 2022
हम बिहार के लड़के
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नमस्कार दोस्तों हिन्दी कविता Romantic Shayari || Break up Shayari || Sad Poetry in Hindi के इस पेज पर आपका स्वागत है। यहां आपको heart touc...
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