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रविवार, 10 मार्च 2024

Romantic Shayari || Break up Shayari || हिन्दी कविता ||

नमस्कार दोस्तों हिन्दी कविता Romantic Shayari || Break up Shayari || Sad Poetry in Hindi  के इस पेज पर आपका स्वागत है। 

यहां आपको heart touching emotional Shayari के साथ साथ हिन्दी कविता और  Romantic Shayari || Break up Shayari || Sad Poetry in Hindi पढ़ने को मिलेंगी ।

मौसम था जो फूलो वाला, अफ़सोस कि वो बीत गया
तूने गले लगाया जिसको, शख्स वो मुझसे जीत गया
सोचा था तू समझेगा तो, होगी कोई कमी नहीं
पर वियोग में यह क्या देखा, उन नयनों में नमी नहीं 
सदानन्द कुमार
समस्तीपुर बिहार

महावीर अशोक बुद्ध कई, नाम गिनो तो आते हैं 
मोती भारत को दिये कई, तिरने पर जब आते हैं
जीवठ हम में जिंदा है, परिवर्तन हम चिंगारी हैं
धीरज शौर्य और साहस का पर्याय हम बिहारी हैं
सदानन्द कुमार
समस्तीपुर बिहार 

लिखकर प्रेम पत्र जो मैंने,तेरे मन पर छोड़ दिया
ठांव लिखा कागज़ पर तेरा,और पता निज जोड़ दिया
पर खाली पन्ने देना तुम, यदि अनुनय स्वीकार नहीं 
बिन अनुमति के प्रिय तुम्हारे, मेरा कुछ अधिकार नहीं सदानन्द कुमार
समस्तीपुर बिहार 

हिन्दी कविता Sadanand Kumar

Romantic Shayari for gf




गुरुवार, 14 सितंबर 2023

हिन्दी दिवस पर कविता || हिन्दी दिवस पर शायरी || " हिन्दी माई "

हिन्दी दिवस पर कविता || हिन्दी दिवस पर शायरी || 

नमस्कार दोस्तों, स्वागत है आपका हिन्दी को समर्पित इस पेज पर। हिन्दी दिवस के मौके पर मेरी एक कविता,

ज्ञानार्जन का साहस देकर 

मुस्काती दिखती मां हिंदी 

पढ़ लिखकर नूतन रचने का 

ऐसा यश देती मां हिंदी 


यहां अनेकों भाषा बोली 

एक सूत्र यह बांधे बोली 

जब शब्दों ने आंखें खोली 

काव्य सजे मानो रंगोली 


भाषा दूजी समझ ना आयी

तुमरे पास सहजता पायी

बहुत धनी है अपनी माई

बोलो हिंदी मेरे भाई

सदानन्द कुमार

समस्तीपुर बिहार

हिन्दी दिवस पर कविता || हिन्दी दिवस पर शायरी || सदानन्द कुमार समस्तीपुर बिहार


बुधवार, 17 मई 2023

Hindi Shayari || Poets from Samastipur

Hindi Shayari || Poets from Samastipur

पेज पर आपका स्वागत है। 

आप भी यदि समस्तीपुर और आसपास के लोगों को अपनी शायरी या कविता सुनाना चाहते हैं तो हमें इस नंबर पर व्हाट्स ऐप करें।

9534730777

लिखी अपनी कहानी में तुझे मैंने बताया है

जहां ऐसी जरूरत थी वहां तुझको छिपाया है

रहे तेरी खुमारी में दिया उसका किराया है

लिखा जो कुछ कभी मैंने सुनो वो भी बकाया है


सदानन्द कुमार 

समस्तीपुर बिहार

सभीपुर के कवि सदानंद कुमार









साथ छूटा मैं तमाशा बन गया

ख्वाब टूटा मैं फसाना बन गया

सोचता था मैं अनाड़ी हूं अभी

यार उसका मैं ठिकाना बन गया 


मुहब्बत में दिवानो ने यहां सब कुछ लुटाया है 

असासा बेचकर अपना गिफट उसको दिलाया है

जमाना भूल जाएगा सितम ये की यहां तूने

पुरानी आशिकी के नाम का टैटू छुपाया है

सदानन्द कुमार
समस्तीपुर बिहार


प्रेम करके हमी से छिपाती रही
गीत मेरे हमेशा सजाती रही
हार कर प्रेम में ना कबूला कभी
हार को जीत नित ही बताती रही

हाथ लाली लगाकर दिखाती रही
‍नाम मेरा हिना से बनाती रही
रंग दो ही सुने थे अभी और वो
ओढ़नी पे कई रंग लाती रही
किधर जाएंगे
तुमको लगता है कि सुधर जाएंगे
सदानन्द कुमार
समस्तीपुर बिहार

गुरुवार, 27 अप्रैल 2023

Sad Poetry in Hindi || Broken Heart Shayari

Sad Poetry in Hindi || Broken Heart Shayari पोस्ट पर आपका स्वागत है ।

दोस्तों, Sad Poetry in Hindi और Broken Heart Shayari सदियों से चली आ रही है। ये खुद को व्यक्त करने का एक रूप हैं जो हमें वैसे लोगों से जुड़ने का मौका देता है जिन्होंने ऐसी भावनाओं को जिया हो। ये कविताएँ और शायरियाँ कभी कभी बेहद मार्मिक तो कभी कभी हल्की उदासी लिए हो सकती हैं।


Sad Poetry in Hindi और Broken Heart Shayari के इतने लोकप्रिय होने का एक कारण यह है कि इन कविताओं और शायरियों को लिखने या पढ़ने से हमें अपनी भावनाओं को व्यक्त करने और अपने दर्द को समझने में मदद मिल सकती है। यह कविताएं जीवन में हमें कम अकेला भी महसूस करा सकता है।


Sad Poetry in Hindi और Broken Heart Shayari सुकून देने के अलावा कभी कभी अविश्वसनीय रूप से सुंदर भी होती है। दिल टूटने के दर्द को बयां करने के लिए हम अक्सर रूपकों और ज्वलंत कल्पना का उपयोग करते हैं। उदाहरण के लिए, एक broken heart की तुलना टूटे हुए आईने से की जा सकती है, या दर्द को एक तूफानी समुद्र के रूप में बयां किया जा सकता है। ये रूपक कविताओं और शायरियों को और अधिक शक्तिशाली बनाते हैं।


 यदि आप एक कठिन समय से गुजर रहे हैं और कुछ आराम की जरूरत है, तो Sad Poetry in Hindi और Broken Heart Shayari वही हो सकती है जो आपको चाहिए। 

अंत में, Sad Poetry in Hindi और Broken Heart Shayari  अभिव्यक्ति के शक्तिशाली रूप हैं जो हमें दिल टूटने के साथ आने वाली कठिन भावनाओं को दिशा दिखाने में मदद कर सकते हैं। वे हमें याद दिलाते हैं कि हम अपने अनुभवों में अकेले नहीं हैं। यदि आप दिल टूटने से जूझ रहे हैं, तो इस शैली की कविता आपको काफी सुकून दे सकतीं हैं ।

आईए कुछ Sad Poetry in Hindi और Broken Heart Shayari देखते हैं ।


1)

आसमां में एक कविता लिख दूं मैं नाम तुम्हारे

परियां जिसे पढ़ती हो और हमारा प्रेम निहारे

छुप कर कमरे में कविताएं पढ़ने तुम आती हो

ये चंदा और जुगनू सारे जाने हैं मनोभाव तुम्हारे


2)

लिखकर मुझे मिटा दिया, भूल गई मम प्रीत

सजल नयन रो रो कहे, तुम मम मन की मीत

शरद ऋतु की सांझ में गौरैया के गीत

गौरैया भी गा रही, तुम संग मम अतीत


3)

डूब जाने से पहले एक बार, दूर तलक तर लेना था,

भींगे नयनों के कोर से तुमरे, पोर पोर भर लेना था,

ठंडे ठहरे ताल में तुम जब जल तरंग बनाती थी,

 निज भवंर भूल कर सबको तुमसे प्रेम कर लेना था,


सदानन्द कुमार समस्तीपुर बिहार

Sad Poetry in Hindi || Broken Heart Shayari

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रविवार, 23 अप्रैल 2023

हास्य व्यंग कविता हिन्दी || राजनैतिक व्यंग शायरी || राजनीति पर व्यंग्य कविता || ' नेता गर बनना हो '

 || राजनैतिक व्यंग शायरी || राजनीति पर व्यंग्य कविता || हास्य व्यंग कविता हिन्दी || राजनैतिक व्यंग शायरी पोस्ट पर आपका स्वागत है ।



वैसे तो आप लोग पढ़ें लिखे लोग हैं और इससे पहले आपने अनेकों हास्य व्यंग कविता हिन्दी , राजनैतिक व्यंग शायरी और राजनीति पर व्यंग्य कविता इत्यादि पढ़ रखें होंगे । पढ़ कर पचा भी चुके हैं इसलिए आशा करता हूं कि आप लोग मुझे भी फैलने का अवसर जरूर देंगे ।

दोस्तों जैसा कि आप सब जानते ही हैं कि आजकल दूसरों की खटिया खड़ी कर देने का दौर है, कोई किसी बहाने मेरी खटिया खड़ी ना कर दे इसलिए मैं पहले ही एक डिस्क्लेमर दे देना चाहता हूं कि यह कविता पूर्णतः मौज मस्ती में लिखी गई कविता है, इसको गंभीरता से न लें और न ही इससे अपनी भावनाओं को आहत होने दें, ये कविता भावनाएं आहत करने के लिए नहीं लिखी गई है ।

हां एक बात और कविता में मात्रा और वर्ण की खामियां निकाल कर मेरी भी भावनाएं आहत न करें । 

छोटा सा कवि उछलना चाहता है तो इसमें आपसब का सहयोग अपेक्षित है, ध्यान रहे उछलना चाहता हूं ऐसा न हो कि आप लोग मुझे कुदा दें वो भी गड्डे में ।

उछलने और कूदने में फर्क होता है भाई !

तो ज्यादा चकलल्स न करते हुए प्रस्तुत है मेरी स्वरचित रचना

' नेता गर बनना हो ' 

( हास्य व्यंग कविता हिन्दी || राजनैतिक व्यंग शायरी )


नेता गर बनना हो, ये दिल में तमन्ना हो

काम चुन कर कोई, ऐसा नीच कीजिए,


चाहते हो आपको जो, मानते हो आपको जो

खोपचे में ले जाकर, उन्हें मूड़ लीजिए


लंबी लंबी फेंका करें, कभी भी ना झेंपा करें

पप्पु फेंकु होने तक,  फाड़ू  स्पीच दीजिए


मुख पर तेज रहे, इतना करेज रहे

गुरु जी की लंगोटी को , फाड़े फाड़े दीजिए


गाली गुत्था आता ही हो, पद सब भाता ही हो

पैसा चंदा सब कुछ, संत बन लीजिए


कोई गर विरोधी हो, सज्जन भले बोधी हो

बगुला भगत बन, उन्हें रेल दीजिए


बिकास बौखत रहें, ढ़ांचे दरकत रहें

पार्टी दल वाला सर, खेल कर लीजिए


फंसा कर निज पेंच, कर लियो सब केंच

माल मोटा देख कर, मेल कर लीजिए

© सदानन्द कुमार

    समस्तीपुर बिहार

शनिवार, 10 दिसंबर 2022

हम बिहार के लड़के


1) वैसे तो निज नाम बताना 
हमको व्यर्थ सा लगता है
मेरे अंदर का अर्जून 
शौर्य को सर्वज्ञ समझता है

2) हम बिहार के लड़के हैं
हमने अभावों को जीता है
खुले आसमान के नीचे हमने
 क ख ग घ सीखा है

3) धैर्य न खोना सखा अगर
नैराश्य की स्याही बनी रहे
लक्ष्य पाने तक मित्र मेरे
लगन की ज्योति जली रहे

4) देखो उनका जीवठ भी
योद्धा जो रण में बड़े हुए
कुंद करने को उनकी बुद्धि
लोग कैसे खड़े हुए

5) पद वालों की दृष्टि में 
हम तुम बहुत मामूली है
पर वे ये ना भूले की 
वे भी जनतंत्र की धूली है

6) फ़र्ज़ तो उनका था कि
व्यवस्था ठीक चलाते वे
देश चलाने की खातिर
प्रतिभा चुन कर लाते वे

7) चोखा खिचड़ी खाकर भी
हम मेरिट तो लाते हैं
डिग्री देने वाले सेशन
अक्सर लेट हो जाते हैं

8) ढिल्लम सिलल्म में ना जाने
जवानी कैसे गुम हुई
भविष्य हमारे इन लोगों के
दस्तखत की कुटुंब हुई

9) पटना पढ़ने आया लड़का
जिन सपनों को जीता है
वे क्या जाने तंगहाली में
संघर्षों को कैसे पीता है

10)  करें क्या मेरिटधारी लड़का
गर टैलेंट का मान न हो
चाणक्य जन्मेगी कैसे धरती
गर वक्त पर इम्तिहान न हो


सदानन्द कुमार
समस्तीपुर बिहार


सोमवार, 7 नवंबर 2022

पूस प्रवास भाग 3 और भाग 4

" पूस प्रवास " भाग-03

 ( सफरनामा )
यूं तो हम भारतीय लोगों के लिए रेल का सफर महज दो स्थानों के बीच की दूरी तय करने भर की बात नहीं होती । हमारे लिए रेल की यात्रा हर बार एक संस्मरण की जननी होती है, लेकिन जब मन किसी गंभीर चिंतन मनन में लीन हो तब हर सुखद परिस्थिति आनन्द दे ये जरूरी नहीं । हमारे गूची भाई भी किसी तरह रेल मे सवार हो तो गए लेकिन उनका मन अब भी नौकरी और जीवन में ज्ञान के असली निहितार्थ के बीच में झूल रहा था । किसी तरह मन को तात्कालिक विश्राम देकर गूची जी ठसाठस भरें कोच में धीरे धीरे कछुए के माफिक अपना दो सूटकेस लिए अपने सीट के तरफ बढ़े, अपने सीट पर आकर गूची जी ने जैसे ही अपना सूटकेस अपने बर्थ पर टिकाया कि पास खड़ी कोमल काया , आधुनिक मेकअप से सुसज्जित और मनहर ऐटिट्यूड वाली नवयुवती धीरे से गूची जी के सीट पर कोने में सरक कर बैठ गई, वैसे तो अगर इस कोमल काया लड़की के जगह कोई हालात का मारा पुरुष गूची के सीट पर बैठता तो गूची जी इसे अपने अधिकारों का हनन और सीट पर नाजायज अतिक्रमण समझते पर बात यहां कोमल काया मृगनयनी की थी तो मजाल है कि गूची जी के मुख से आपत्ति का आ भी निकल जाए । गूची तो मन ही मन सोच रहे थे कि ससुरा जीवन इतना भी नीरस नहीं जितना वो अभी समझ रहा था, बैठने को तो यह लड़की बगल की सीट पर भी बैठ सकती थी पर मेरे ही सानिध्य में बैठना शायद किसी सुखद परिणीती की सूचक हैं । 
बड़ी ही झिझक से गूची जी ने दांत निपोरे एक बड़ा विनम्र सवाल इस नवयौवना की तरफ दागा- " जी, वो आपकी सीट कौन सी है ? " 
तरूणी ने भी बड़ी आत्मीयता के साथ कहा कि " जी फिलहाल तो मेरी सीट कन्फर्म नहीं है, वेटिंग है, आप बहुत सभ्य और सौम्य लगे इसलिए मैं यहां बैठने का साहस कर पाई । आपको अगर तकलीफ़ ना हो तो क्या मैं यहां थोड़ी देर बैठ जाऊं, टीटी के आते ही मैं कुछ एरेजमेंट कर लूंगी । " 
गूची जी ने इस कन्या के मुख से संपादिक वाक्यों में बस इतना ही सूना कि "आप मुझे बहुत सभ्य और सौम्य लगें, बस इतना ही सूना कि गूची जी के मन में इतना बड़ा लड्डू फूटा कि उसके धमाके में गूची जी ने आगे कुछ सूना ही नहीं, बस भाव विभोर होकर मुण्डी डोलाते रह गए ।
क्रमशः,,,

                      " पूस प्रवास " भाग-04
                              ( सफरनामा )
यूं तो स्त्री पुरुष में आकर्षण के कई आयाम हो सकतें हैं परंतु मानव गुण धर्म पर पीएचडी ढोक चुके स्काॅलरस का ऐसा मानना है कि हास्य विनोद में पारंगत पुरुष, स्त्रियों को, और रूपवती स्त्रियां, पुरुषों को स्वाभिक रूप से आकर्षित करते हैं । हमारे गूची जी भी ऐसे ही रूपवती सहयात्री के सहयोग की कामना करते हुए सफ़र को एन्ज्वाय करते चले जा रहे थे परन्तु वार्तालाप शुरू करने में गूची जी सहजता महसूस नहीं कर पा रहे थे । शायद गूची जी कि इसी असहजता को महसूस करते हुए  नवयौवना ने स्वयं ही संवाद शुरू किया और बड़े ही सौम्य लहज़े में पूछा-" आपने बताया नहीं कि आपको कोई तकलीफ़ तो नहीं अगर मैं यहां थोड़ी देर बैठ जाऊं ।"
गूची जी लगभग घिघयाते हुए बोले-" नहीं नहीं मुझे कोई तकलीफ़ नहीं, आप आराम से बैठे ।" 
इतना कहते हुए गूची जी ने एक प्रशन भी साथ साथ चिपका दिया " क्या आप अकेले सफर कर रही हो ।"
अब लड़की ने अपनी मंद मुस्कान के साथ संवाद में मिश्री घोलते हुए कहा- " यस, आई एम टोटली एलोन, बट ईट्स फाईन । " 
गूची ने मानो ऐसी ब्युटीफुल ईग्लिश जीवन में पहली बार देखा था अअ , मेरा मतलब सुना था😜 पर मदहोशी को कंन्ट्रोल करते हुए बोले -" यस, नो ईश्शू , पर आप अकेली क्यूं , वो भी वेटिंग टिकट के साथ, क्या परेशानी नहीं होगी? "
अब तक लड़की गूची जी के वजन को तौल चुकी थी इसलिए तपाक से बोली " जी  आप जैसे सभ्य लोग के होते हुए , उतनी परेशानी नहीं । वैसे भी मैं यहां कलकत्ते से इंजीनियरिंग कर रही हूं, महीने दो महीने में एक बार घर जाती ही रहतीं हूं, हर बार कन्फर्म टिकट तो नहीं मिलता, मुझे आदत है, वैसे भी मात्र छः सात घंटे का ही सफर है । "
शायद लड़की ने एक बार में इतना सब इसलिए कह बताया ताकि गूची जी के तरफ से अब कोई अवांछित प्रशन ना उठे ,,,
क्रमशः,,,
सदानन्द कुमार
सदानन्द कुमार
Instagram id: @gyani_sada

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