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रविवार, 10 मार्च 2024

Romantic Shayari || Break up Shayari || हिन्दी कविता ||

नमस्कार दोस्तों हिन्दी कविता Romantic Shayari || Break up Shayari || Sad Poetry in Hindi  के इस पेज पर आपका स्वागत है। 

यहां आपको heart touching emotional Shayari के साथ साथ हिन्दी कविता और  Romantic Shayari || Break up Shayari || Sad Poetry in Hindi पढ़ने को मिलेंगी ।

मौसम था जो फूलो वाला, अफ़सोस कि वो बीत गया
तूने गले लगाया जिसको, शख्स वो मुझसे जीत गया
सोचा था तू समझेगा तो, होगी कोई कमी नहीं
पर वियोग में यह क्या देखा, उन नयनों में नमी नहीं 
सदानन्द कुमार
समस्तीपुर बिहार

महावीर अशोक बुद्ध कई, नाम गिनो तो आते हैं 
मोती भारत को दिये कई, तिरने पर जब आते हैं
जीवठ हम में जिंदा है, परिवर्तन हम चिंगारी हैं
धीरज शौर्य और साहस का पर्याय हम बिहारी हैं
सदानन्द कुमार
समस्तीपुर बिहार 

लिखकर प्रेम पत्र जो मैंने,तेरे मन पर छोड़ दिया
ठांव लिखा कागज़ पर तेरा,और पता निज जोड़ दिया
पर खाली पन्ने देना तुम, यदि अनुनय स्वीकार नहीं 
बिन अनुमति के प्रिय तुम्हारे, मेरा कुछ अधिकार नहीं सदानन्द कुमार
समस्तीपुर बिहार 

हिन्दी कविता Sadanand Kumar

Romantic Shayari for gf




रविवार, 17 सितंबर 2023

हर बार पूछती हो "कैसे हो" || Hindi love letters || Hindi love story || Hindi Kahani ||

|| Hindi love letters || Hindi love stories ||हर बार पूछती हो "कैसे हो" 

Classic love story || Romantic love story ||

हर बार पूछती हो "कैसे हो" 

बम्बई

13 मई 1983

” स्वरा ”

पिछले मंगल को चिट्ठी मिली थी तुम्हारी पर जवाब अब दे रहा हूं लिहाजा मेरा जवाबी खत़ भी तुम्हे देर से ही मिलेगा,

देर होता देख, तुम्हारा संतोषी मन तुम्हे ये ढ़ाढ़स बंधाने लगेगा की शायद काम धंधे मे काफी व्यस्त होगा, पर ऐसा नही है,

मेरे पास व्यस्तता के नाम पर फिलहाल इतना ही है की सवेरे सारी डिग्रीयो को समेट कर मैं हर दफ्तर मे याचक की भांति अपने काबिल होने का प्रूफ और नौकर बनने की अर्जी जमा कराता फिरता हूं,

तुम्हे देर से जवाब देने का कारण कुछ और भी है, तुम्हे पता है की तुमसे हर बार हर बात मै बिना किसी पूर्वाग्रह के कह देता हूं, और इसकी आजादी भी तुमने ही मुझे दी है, तुम अपने उम्र और परिवेश से ज्यादा परिपक्व जो ठहरी ,

युवतियो के लिए दमघोंटू अभिशप्त समाज मे चिट्ठी लिख कर पोस्ट करने मे जितनी मशक्कत तुमको करनी पड़ती होगी, मन के अंर्तद्वंद के कारण उतनी ही मशक्कत मेरे हिस्से भी है ,

तुम्हे जवाबी खत़ लिखने मे मुझे भी कई अंर्तद्वंद से पीछा छुड़ाना पड़ता है,

हर बार पूछती हो ” कैसे हो ”

तुम्हारे किसी सवाल के जवाब मे मुझसे झूठ बोला नही जाता,

और सच बोल कर मै खुद को कमजोर पेश नही करना चाहता

तुम जो कहती थी मुझे की “बहुत जूझारू हो तुम” मेरे लिए वो एक कमाई हुई दौलत है

बहुत एहतियात से तुमको जवाबी खत़ लिखता हूं की खत़ का भाव क्या रखूं की तुम वैसी ही मेरे जूझारूपन पर नाज़ करती रहो बस यही मन बनाते हुए जवाबी खत़ लिखने मे देर हो जाती है

जितना तुमको जान गया हूं उस हिसाब से मुझे मालूम है की तुम चिढ़ कर यही कहोगी की इतनी दिक्कत है तो मत दो जवाब ,, मै भी खत़ नही लिखती ,,

पर सूनो खत़ लिखना बंद मत कर देना , मेरे पास यहां बेहिसाब अकेलापन है, शहर की हर सुबह ये एहसास दे कर उठाती है की तुम दूर हो मुझसे,

दोपहर भी ऐसी ही कट जाती है , शहर की भीड़ भी बियांबान सी होती है , एक सूकून बस इतना है की रात को मेरे कमरे की खिड़कियो से चांदनी रौशनी आती है और लेटे लेटे आसमान और तारे साफ दिखते है,

लेटे हुए मै अपने कल का सारा रूटीन सोच लेता हूं , और तुम्हारा आज का दिन कैसा बीता होगा ये कल्पना भी सजीव हो उठती है ,

मन वही छोड़ कर आ गया हूं मै तुम्हारे पास , अपने गली अपने गावं मे, एक तुम्हारे लफ्ज ही है जो सांसे देते है हर बार जब भी पढ़ता हूं इनको , दूरूस्त रहूं इसलिए खत़ देती रहना,

अंत में तुम्हारे सवाल का जवाब – मैं ठीक हूं , हिम्मत नहीं हारी है , अभी जीत बाकी है, तुमको जीत लेना अभी बाकी है |

कुशल रहो हमेशा

” मलय ”

क्रमशः,,,

सदानन्द कुमार 

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अगला भाग जल्दी ही हमसे जुड़ें रहें,,,

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